21 प्राथमिक विद्यालयों का कायाकल्प उत्तराखंड सरकार की शिक्षा सुधार योजना के तहत एक महत्वपूर्ण कदम है। देहरादून में शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने 21 जर्जर प्राथमिक विद्यालयों के पुनर्निर्माण और सुधार कार्यों के लिए 3.52 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।
इस योजना का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना है तथा सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता को मजबूत करना है।
किन जिलों में होगा 21 प्राथमिक विद्यालयों का कायाकल्प?
21 प्राथमिक विद्यालयों का कायाकल्प योजना के अंतर्गत उत्तराखंड के चार जिलों को शामिल किया गया है:
पिथौरागढ़, देहरादून, ऊधमसिंह नगर और अल्मोड़ा।
इन जिलों के सरकारी विद्यालयों के जर्जर भवनों का पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्य किया जाएगा।
क्या-क्या कार्य होंगे शामिल?
इस योजना के तहत निम्न कार्य किए जाएंगे:
विद्यालय भवनों का पुनर्निर्माण
छत और फर्श की मरम्मत
चहारदीवारी का निर्माण
अन्य आवश्यक सुधार कार्य
इन कार्यों से विद्यालयों का ढांचा मजबूत होगा और छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
बजट और प्रमुख आवंटन
21 प्राथमिक विद्यालयों का कायाकल्प योजना के लिए कुल 3.52 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
ऊधमसिंह नगर में चन्देली थारू के लिए 23.44 लाख और महुआखेड़ा के लिए 12.46 लाख स्वीकृत किए गए हैं।
पिथौरागढ़ जिले में तिलढुकरी, गोलमान, बोराबुंगा, कुनिया, किम्टा, कवाधार, ख्वांकोट, सूनी, कमतोली, नारायणनगर और भड़गांव सहित कई विद्यालयों के लिए अलग-अलग धनराशि स्वीकृत की गई है।
देहरादून में तुनवाला-2, आराघर, नालापानी, जोहड़ी और चांदपुर के विद्यालय शामिल हैं।
अल्मोड़ा में लामासिंह विद्यालय के लिए भी बजट जारी किया गया है।
इसके अतिरिक्त डीडीहाट क्षेत्र के बन्दरलीमा विद्यालय के लिए 16.90 लाख रुपये अलग से स्वीकृत किए गए हैं।
कौन करेगा निर्माण कार्य?
निर्माण कार्य के लिए पेयजल निगम, ग्रामीण निर्माण विभाग और मंडी परिषद को जिम्मेदारी दी गई है। इन संस्थाओं को शीघ्र कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का लक्ष्य
21 प्राथमिक विद्यालयों का कायाकल्प का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना है।
सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में भी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो।
मंत्री का बयान
शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि जर्जर विद्यालय भवनों का पुनर्निर्माण सरकार की प्राथमिकता है और इससे शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

