राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, नियमों पर पुनर्विचार की मांग; रामलीला मैदान से डीएम कार्यालय तक निकाली महारैली
हल्द्वानी। यूजीसी बिल के प्रावधानों के विरोध में शनिवार को हल्द्वानी में सवर्ण शक्ति संगठन उत्तराखंड के बैनर तले बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने रामलीला मैदान से महारैली निकालते हुए जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय तक मार्च किया और डीएम ललित मोहन रयाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में कानून के कुछ प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की गई है।
रामलीला मैदान में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए संगठन के संयोजक प्रकाश हर्बोला ने कहा कि यूजीसी की गाइडलाइन में शिकायत प्रक्रिया को लेकर असंतुलन दिखाई देता है। उनका कहना था कि झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ स्पष्ट कार्रवाई का प्रावधान नहीं है, जबकि जिस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत की जाती है उसका करियर प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नियमों के तहत छात्र, शिक्षक, प्रधानाचार्य या वाइस चांसलर किसी भी शिकायत की स्थिति में दंडित हो सकते हैं, लेकिन शिकायतकर्ता की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई है। इससे शिक्षा संस्थानों में डर का माहौल बन सकता है।
सह संयोजक भुवन भट्ट ने कहा कि शिक्षा संस्थान संवाद और ज्ञान के केंद्र होने चाहिए। उन्होंने मांग की कि सभी वर्गों के लिए समान और पारदर्शी शिकायत तंत्र लागू किया जाए। संगठन का कहना है कि किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए और नियमों की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है।
प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विवादित प्रावधानों की समीक्षा करने और संतुलित व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आगे भी आंदोलन जारी रहेगा।
इस अवसर पर जगत सिंह बिष्ट, त्रिलोक सिंह बिष्ट, तरुण वानखेड़े, मनोज अग्रवाल, प्रताप जोशी, योगेंद्र भट्ट, लखन निगलटिया, मदन मोहन जोशी, विपिन पांडेय, नवीन पंत, गोविंद बगड़वाल, तेज सिंह कार्की, सीमा बत्रा, ज्योति अवस्थी, अनिता जोशी, काजल खत्री, बबीता जोशी, प्रभा खनका, परमजीत कौर, सुरेंद्र नरूला, अमर सिंह ऐरी, कंचन रौतेला, दरबान सिंह, अतुल गुप्ता, योगेश शर्मा, शेखर ऐरी, आरपी सिंह, हर्षवर्धन पांडे, कैलाश जोशी, प्रमोद पंत, रवि जोशी और गौरव तिवारी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

