नई दिल्ली।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) में हुई कुछ नियुक्तियों को लेकर विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही जानकारी के अनुसार FSSAI में डायरेक्टर पद पर तैनात स्वीटी बेहेरा की नियुक्ति पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि उनके अनुभव और वेतन (CTC) से जुड़े दावों में कथित विसंगतियां सामने आई हैं।
बताया जा रहा है कि FSSAI ने 26 दिसंबर 2024 को एक समिति का गठन किया था, जिसका उद्देश्य डायरेक्ट भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित अधिकारियों के शैक्षणिक योग्यता और अनुभव से जुड़े दस्तावेजों की जांच करना था। इस समिति को उम्मीदवारों द्वारा दिए गए दस्तावेजों और दावों का सत्यापन करने का जिम्मा सौंपा गया था।
जांच में दस्तावेजों की जांच
रिपोर्ट के अनुसार समिति ने कई अधिकारियों के दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान कुछ मामलों में दस्तावेजों और दावों के बीच कथित अंतर पाए जाने की बात सामने आई।
सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया है कि कुछ अधिकारियों के अनुभव पत्र या दस्तावेज अधूरे या संदिग्ध पाए गए। हालांकि इस मामले में आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
अनुभव को लेकर उठे सवाल
वायरल जानकारी के अनुसार डायरेक्टर पद पर तैनात स्वीटी बेहेरा ने अपने आवेदन में 2006 से 2020 तक नेस्ले इंडिया में कार्य करने का अनुभव बताया था।
हालांकि दस्तावेजों की जांच के दौरान यह दावा किया गया कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार उनकी नौकरी 2007 से शुरू हुई थी, जिससे अनुभव में लगभग 11 महीनों का अंतर सामने आया।
CTC दावे को लेकर भी विवाद
सोशल मीडिया पर सामने आए दस्तावेजों में यह भी दावा किया गया है कि आवेदन के दौरान अंतिम दो वर्षों में 18 लाख रुपये से अधिक CTC होने की बात कही गई थी।
लेकिन कथित जांच रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार उम्मीदवार निर्धारित CTC मानकों को पूरी तरह पूरा नहीं कर रहे थे।
नियमों के उल्लंघन का आरोप
वायरल पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि यदि किसी उम्मीदवार द्वारा भर्ती प्रक्रिया के दौरान अनुभव, वेतन या नौकरी से जुड़ी गलत जानकारी दी जाती है तो नियमों के अनुसार उस पर कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि इस पूरे मामले में आधिकारिक स्तर पर क्या कार्रवाई हुई है, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कई लोग इस मामले में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं और भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि इस तरह के आरोपों की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही होनी चाहिए।

