ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने शनिवार को प्रतिभाग किया। इस अवसर पर राज्यपाल गंगा तट पर आयोजित भव्य गंगा आरती में भी शामिल हुए।
प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले इस महोत्सव में इस वर्ष विश्व के 80 से अधिक देशों से लगभग 1500 योग साधक, राजदूत, योगाचार्य और आध्यात्मिक साधक शामिल हुए।
योग विश्व में शांति और संतुलन का मार्ग
देश-विदेश से आए योग प्रेमियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि माँ गंगा के पावन तट और हिमालय की गोद में आयोजित यह महोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि मानवता को जोड़ने वाली आध्यात्मिक चेतना का उत्सव है।
उन्होंने कहा कि जब दुनिया के अलग-अलग देशों से आए लोग योग और साधना के माध्यम से एक स्थान पर एकत्र होते हैं तो यह ऊर्जा और प्रेरणा का अद्भुत संगम बन जाता है।
योग केवल व्यायाम नहीं, आत्मिक जागरण का माध्यम
राज्यपाल ने कहा कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं बल्कि मन, शरीर और आत्मा को संतुलित करने की प्रक्रिया है। योग के नियमित अभ्यास से व्यक्ति के विचारों में सकारात्मकता आती है और उसके भीतर रचनात्मकता तथा ऊर्जा का विकास होता है।
उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे योग के इस सकारात्मक संदेश को अपने-अपने देशों तक पहुँचाएँ।
उत्तराखंड की अतिथि देवो भवः परंपरा
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड सदैव “अतिथि देवो भवः” की परंपरा के साथ विश्व का स्वागत करता आया है। यहाँ आने वाला प्रत्येक अतिथि परिवार के सदस्य के समान है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विभिन्न देशों से आए योग साधक जब यहाँ से लौटेंगे तो वे योग, शांति और मानवता का संदेश पूरी दुनिया में फैलाएँगे।
परमार्थ निकेतन ने किया आयोजन
इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि योग भारत की वह अमूल्य देन है जो मनुष्य को जीवन के वास्तविक उद्देश्य की ओर अग्रसर करती है।
कार्यक्रम में प्रथम महिला गुरमीत कौर, साध्वी भगवती सरस्वती, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, उपजिलाधिकारी चतर सिंह चौहान, तथा कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या सहित बड़ी संख्या में योग साधक और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

