फूलदेई पर्व देहरादून में इस वर्ष खास उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिली। चैत्र मास की संक्रांति और बसंत ऋतु के आगमन के प्रतीक इस पर्व को बच्चों ने पूरे जोश और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ मनाया।
भाजपा प्रदेश कार्यालय में यह आयोजन महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष रूचि भट्ट के निर्देशानुसार प्रदेश महामंत्री हिमानी वैष्णव द्वारा किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ना था।
बच्चों ने सजाई देहरी, गूंजे लोकगीत
फूलदेई पर्व देहरादून के अवसर पर नन्हे-मुन्ने बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। उनके हाथों में रिंगाल की सुंदर टोकरियां थीं, जिनमें बुरांश, फ्योली और सरसों के पीले फूल सजे हुए थे।
बच्चों ने कार्यालय की देहरी पर फूल सजाए और पारंपरिक लोकगीत “फूलदेई छम्मा देई, दैणी द्वार भर भकार…” गाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान पूरा वातावरण सांस्कृतिक रंग में रंगा हुआ नजर आया और वहां उपस्थित लोगों ने बच्चों की प्रस्तुति की जमकर सराहना की।
भाजपा नेताओं ने किया उत्साहवर्धन
इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेन्द्र भट्ट और प्रदेश महामंत्री (संगठन) अजय कुमार ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
उन्होंने बच्चों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि इस प्रकार के आयोजन हमारी संस्कृति को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में महिला मोर्चा कार्यालय सह-प्रभारी बबली चौहान, प्रदेश प्रवक्ता जानकी नोटियाल, गढ़वाल संयोजक रेखा डंगवाल तथा सह-संयोजक अर्चना बागड़ी सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहीं।
लोकसंस्कृति का प्रतीक है फूलदेई पर्व
फूलदेई पर्व देहरादून केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है। इस पर्व को विशेष रूप से बच्चों द्वारा मनाया जाता है, जो घर-घर जाकर देहरी पर फूल डालते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
इस दौरान लोग बच्चों को गुड़, चावल और अन्य उपहार देकर आशीर्वाद देते हैं। यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देती है।
बसंत ऋतु के स्वागत का पर्व
फूलदेई पर्व देहरादून बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है। जब प्रकृति नए रंगों से सजती है, पेड़ों पर नए फूल खिलते हैं और वातावरण में ताजगी का अहसास होता है, तब यह पर्व मनाया जाता है।
इस अवसर पर भाजपा प्रदेश कार्यालय में भी बच्चों को गुड़, चावल और अन्य भेंट देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने इस पहल की सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
निष्कर्ष
फूलदेई पर्व देहरादून का यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि यह नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी बना। बच्चों की भागीदारी और उत्साह ने यह साबित कर दिया कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति आज भी जीवंत है।
ऐसे आयोजनों से समाज में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ती है और आने वाली पीढ़ियां अपनी परंपराओं को समझकर उन्हें आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित होती हैं।

