चम्पावत नाबालिग दुष्कर्म मामला में SIT जांच के बाद सामने आई सच्चाई
चम्पावत/देहरादून:
उत्तराखण्ड में चर्चित चम्पावत नाबालिग दुष्कर्म मामला को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर कई तरह की भ्रामक चर्चाएं और दुष्प्रचार फैलाए जा रहे थे। मामले को लेकर बिना पुष्टि के अलग-अलग दावे किए जा रहे थे, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी। अब पुलिस की SIT जांच और तकनीकी साक्ष्यों के बाद पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ गई है।
उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि घटना की सूचना मिलते ही उन्होंने रेखा यादव से बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी ली थी। शुरुआती जांच में ही पुलिस को मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा था, जिसके बाद निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से जांच आगे बढ़ाई गई।
SIT टीम ने सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और फॉरेंसिक रिपोर्ट सहित कई तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि पूरा मामला व्यक्तिगत रंजिश के तहत रची गई कथित साजिश था। पुलिस जांच के अनुसार, कुछ लोगों द्वारा निजी दुश्मनी निकालने के लिए एक नाबालिग बालिका का इस्तेमाल किया गया।
महिला आयोग ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन कानून का गलत इस्तेमाल कर निर्दोष लोगों को फंसाने की कोशिश भी उतनी ही गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है। आयोग ने स्पष्ट कहा कि किसी भी व्यक्ति को समाज में झूठी खबरें फैलाकर माहौल खराब करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
चम्पावत नाबालिग दुष्कर्म मामला में फैले दुष्प्रचार के कारण कई लोगों के मन में भ्रम की स्थिति बन गई थी। अब SIT जांच के बाद सामने आए तथ्यों ने स्थिति को स्पष्ट कर दिया है। महिला आयोग ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि की खबरों को साझा करने से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कहा कि कानून का दुरुपयोग कर निर्दोष लोगों की सामाजिक छवि खराब करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आयोग इस पूरे मामले की अंतिम कानूनी प्रक्रिया तक निगरानी बनाए रखेगा।

