हल्द्वानी यूजीसी बिल विरोध प्रदर्शन के तहत शनिवार को शहर में बड़ा जनआंदोलन देखने को मिला। सवर्ण शक्ति संगठन उत्तराखंड के बैनर तले बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और यूजीसी बिल के प्रावधानों के खिलाफ आवाज उठाई।
प्रदर्शनकारियों ने रामलीला मैदान से जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय तक महारैली निकाली। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जोर-शोर से उठाया। बाद में प्रतिनिधिमंडल ने जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा।
रामलीला मैदान से निकली महारैली
हल्द्वानी यूजीसी बिल विरोध प्रदर्शन की शुरुआत रामलीला मैदान में आयोजित एक सभा से हुई, जहां बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। इसके बाद सभी प्रदर्शनकारी एकजुट होकर महारैली के रूप में डीएम कार्यालय तक पहुंचे।
रैली के दौरान पूरे शहर में विरोध प्रदर्शन की गूंज सुनाई दी। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इसमें शामिल लोगों की संख्या और उत्साह ने इसे बड़ा आंदोलन बना दिया।
शिकायत प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सभा को संबोधित करते हुए संगठन के संयोजक प्रकाश हर्बोला ने कहा कि यूजीसी की गाइडलाइन में शिकायत प्रक्रिया संतुलित नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान नियमों में झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ कोई स्पष्ट कार्रवाई का प्रावधान नहीं है।
उनका कहना था कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत होने पर उसका करियर प्रभावित हो सकता है, लेकिन शिकायतकर्ता की जवाबदेही तय नहीं की गई है। इससे शिक्षा संस्थानों में असंतुलन और भय का माहौल पैदा हो सकता है।
समान और पारदर्शी व्यवस्था की मांग
सह संयोजक भुवन भट्ट ने कहा कि शिक्षा संस्थान ज्ञान और संवाद के केंद्र होते हैं, जहां निष्पक्षता और पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने मांग की कि सभी वर्गों के लिए समान नियम लागू किए जाएं और शिकायत तंत्र को पारदर्शी बनाया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए और यूजीसी के नियमों की निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए।
राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने जिला मजिस्ट्रेट ललित मोहन रयाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में यूजीसी बिल के कुछ प्रावधानों पर पुनर्विचार करने और संतुलित व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।
हल्द्वानी यूजीसी बिल विरोध प्रदर्शन के जरिए प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे अपने अधिकारों और न्याय के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा हुआ है और इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ सकता है।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
इस दौरान जगत सिंह बिष्ट, त्रिलोक सिंह बिष्ट, तरुण वानखेड़े, मनोज अग्रवाल, प्रताप जोशी, योगेंद्र भट्ट, लखन निगलटिया, मदन मोहन जोशी, विपिन पांडेय, नवीन पंत, गोविंद बगड़वाल, तेज सिंह कार्की, सीमा बत्रा, ज्योति अवस्थी, अनिता जोशी, काजल खत्री, बबीता जोशी, प्रभा खनका, परमजीत कौर, सुरेंद्र नरूला, अमर सिंह ऐरी, कंचन रौतेला, दरबान सिंह, अतुल गुप्ता, योगेश शर्मा, शेखर ऐरी, आरपी सिंह, हर्षवर्धन पांडे, कैलाश जोशी, प्रमोद पंत, रवि जोशी और गौरव तिवारी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

